राम के पुत्र कुश के वंशजों की ओर से बनाई गई जयपुर नगरी में शिल्पकारों को भी लाया गया था. यह शिल्पकार आज भी अपनी कला के जरिए अयोध्या से जुड़े हुए हैं. राजधानी जयपुर के प्रख्यात मूर्तिकार प्रशांत पांडे ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के लिए एक भव्य राम दरबार तैयार करने का जिम्मा लिया है. इस अनूठी मूर्ति को अयोध्या के मुख्य गर्भगृह में प्रथम तल पर प्रतिष्ठित किया जाना है. मूर्तिकार प्रशांत पांडे ने इस कार्य की शुरुआत कर दी है और जल्द ही यह भव्य मूर्ति तैयार होगी. इसके अलावा 20 अन्य प्रतिमाएं जयपुर के कलाकार गढ़ने में लगे हुए हैं. इनमें मंदिर में एक सप्तऋषि मंडल, उसी क्रम में विराजमान होगा. जैसा ब्रह्मांड में नजर आता है. आकाश में यह सप्तऋषि मंडल एक पतंग के आकार में दिखाई देता है, जो डोर के साथ उड़ रही है. अयोध्या के राम मंदिर के परकोटे में यह दिशा के हिसाब से ऋषि प्रतिमाओं के रूप में विराजमान किया जाएगा.
पांडे मूर्ति भंडार के शिल्पकार प्रशांत पांडे और उनका परिवार चार पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण के प्रोफेशन में हैं. वे फिलहाल मुख्य गर्भ गृह के लिए राम दरबार तैयार कर रहे हैं. राम मंदिर निर्माण के दौरान रामलला की श्वेत प्रतिमा से लेकर परिक्रमा मार्ग में सप्त ऋषि से लेकर सबरी और बाकी की दूसरी प्रतिमाओं को तैयार किया. पांडे ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां देश-विदेश के बड़े मंदिरों के लिए मूर्तियां तैयार कर रही है. वे इन मूर्तियों को संगमरमर से तैयार करते हुए आ रहे हैं.

उन्होंने बताया कि इस्कॉन से लेकर स्वामीनारायण मंदिर और राम मंदिर के लिए उन्हीं के यहां से प्रतिमाएं गई हैं . इस राम दरबार में भगवान श्रीराम और माता सीता सिंहासन पर विराजमान होंगे. उनके चरणों में भगवान हनुमान बैठे होंगे. लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न राम दरबार में पास ही खड़े दिखाई देंगे. इस मूर्ति की सबसे खास बात यह होगी कि यह पूर्ण रूप से प्राचीन भारतीय शिल्प कला पर आधारित होगी और इसे मकराना के सफेद संगमरमर पत्थर से निर्मित किया जाएगा. इस राम दरबार की सुंदरता को बढ़ाने के लिए कला की बारीकियों और अलंकरण का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. सिंहासन पर विराजमान श्रीराम और माता सीता के वस्त्रों, आभूषणों और भाव-भंगिमा को अत्यंत सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.