उत्तर प्रदेश: भारत रत्न संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 134वीं जयंती आज पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सभी पार्टियों ने विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह ही हजरतगंज स्थित डॉ आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे.
इसके बाद विधानसभा मार्ग स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जो 18वीं बार आंबेडकर महासभा में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. इससे पहले दो से तीन बार ही अन्य मुख्यमंत्री यहां आए हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम बाबा साहब की बात करते हैं तो देश दुनिया आज भी ये सोचती है कि एक सामान्य मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में, एक गरीब घर में पैदा होकर दुनिया की उच्चतम डिग्री हासिल कर उन कोटि-कोटि लोगों के जीवन में जो वंचित हैं जिनके साथ मानवीय व्यवहार भी नहीं हो पाता था उन लोगों के न्याय के पुरोधा के रूप में लोगों का पूजनीय बन जाए.
आज की पीढ़ी उनकी बात को सुनती है. दुनिया उनकी बातों को सुनती है तो उन सबको लगता है कि वह कोई सामान्य मनुष्य नहीं बल्कि एक महामानव रहा होगा. वह महामानव कोई और नहीं डॉ भीमराव आंबेडकर जी ही थे.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश के महू में जन्म लेने के बाद प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा उन्होंने भारत में ग्रहण की. उसके बाद वे उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए इंग्लैंड चले गए. उनका एक ही संकल्प था अपने लिए नहीं मानव को उनको मानव का अधिकार दिलाना है. वंचित और दलितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए कार्य करना है. इसके लिए आजादी की लड़ाई से लेकर देश की आजादी के लिए बल्कि नागरिकों की आजादी के लिए भी उन्होंने कार्य किया. वे देश की आजादी के आंदोलन में कूद पड़े.
स्वतंत्र भारत में देश के पहले सरकार में उन्हें जब संविधान सभा 1946 में गठित होती है उस सरकार के न्याय मंत्री के रूप में उन्हें कार्य करने का अवसर मिला था. संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए उन्हें चुना गया.
भारत का संविधान आज भी भारत के नागरिक को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ने की सामर्थ्य रखता है. जो लोग भारत की एकता के पक्षधर नहीं थे. जो लोग मानते थे कि भारत स्वतंत्र तो हो रहा है लेकिन एकजुट नहीं रह पाएगा. उनकी मंशा धरी की धरी रह गई.
आज भी 140 करोड़ लोग लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ एकता के सूत्र में बंधकर दुनिया के लिए सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी धाक जमाए है. यह सब भारत के संविधान के कारण ही संभव हो पाया है. डॉ भीमराव आंबेडकर को आज हर व्यक्ति स्मरण करता है.
उनके सपने को आजाद भारत में अगर किसी ने पहली बार साकार किया तो स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ने जो प्रयास प्रारंभ किए थे और उनको एक नई गति देने का काम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है.
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी लगातार आंबेडकर जी और संविधान का अपमान ही करती रही है. कांग्रेस ने तो आंबेडकर स्मारक तक नहीं बनने दिए. ऐसे में आप सभी को इन राजनीतिक दलों से सचेत रहने की आवश्यकता है.