राजनीति की रामा-श्यामा : दीपावली पर बड़े नेताओं के आवास पर लगा जमावड़ा

पांच दिवसीय दीपोत्सव के तहत मंगलवार को भी रामा-श्यामा का दौर जारी है. लोग एक-दूसरे से मिलकर उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दे रहे हैं. वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के नेता भी सुबह से ही अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण पर निकले हुए हैं. आमजन और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करके उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं.

दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता और नेता भी बड़े नेताओं के जाकर रामा-श्यामा कर राजनीतिक आशीर्वाद ले रहे हैं. सत्तारूढ़ भाजपा के लिहाज से इस रामा-श्यामा के अपने राजनीतिक मायने भी निकाले जा सकते हैं, क्योंकि संगठन और सरकार में नियुक्तयां होनी हैं. इसके साथ अगले दो से तीन महीने में पंचायत और निकाय चुनाव भी होने हैं. ऐसे में त्योहार के बहाने हो रही इस रामा-श्यामा के राजनीतिक हल्कों में खास महत्व रखती है. राजनीति में इसका बड़ा लाभ मिलता है.

दिवाली के बाद बड़े नेताओं के घर लगे राजनीतिक रामा-श्यामा के जमावड़े के अपने सियासी मायने हैं. वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक विवेकानंद शर्मा कहते हैं कि किसी भी त्योहार के बाद रामा-श्यामा का एक चलन राजस्थान में शुरू से रहा है. पारिवारिक रूप से भी देखें तो एक दूसरे के घर में जाकर बधाई दी जाती है और बड़ों से आशीर्वाद दिया जाता है. यह परंपरा परिवार के साथ-साथ अब राजनीतिक पार्टियों में भी पहुंच गई है. कांग्रेस हो या भाजपा या अन्य दल, इन पार्टियों के बड़े नेताओं के घर पर कार्यकर्ता और नेता त्योहार बहाने मेल मुलाकात करने जाते हैं और त्योहारी रामा-श्यामा करते हैं.

राजस्थान में भाजपा की सरकार है. ऐसे में मुख्यमंत्री हो या फिर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ उनके घर पर ज्यादा जमावड़ा कार्यकर्ताओं और नेताओं का देखा जा सकता है. इसके राजनीतिक मायने भी हैं, क्योंकि राजस्थान में प्रदेश भाजपा संगठन में कार्यकारणी बनी है और अन्य नियुक्तियां भी होनी हैं. ऐसे में कार्यकर्ता और नेता रामा-श्यामा के बहाने मेल मुलाकात कर रहे हैं. इसी तरह से सरकार में राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं तो वहां पर भी नेताओं का बधाई देने का सिलसिला लगातार जारी है.

इसके साथ ही आने वाले दिनों में राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं. जो चुनाव लड़ने वाले नेता हैं, वह भी दिवाली के बहाने अपने-अपने बड़े नेताओं के यहां पर हाजिरी लगा रहे हैं. विवेकानंद कहते हैं कि राजस्थान में ऐसे कई नेता भी हैं जो अब राजनीति में उसे हैसियत पर नहीं हैं, जिस पर वह पहले कभी हुआ करते थे. एक दौर था तब उनके यहां पर दिवाली हो या अन्य फेस्टिवल लोगों का हुजूम होता था. अब वहां पर गिने चुने लोग ही पहुंच रहे हैं. यह सब राजनीति के उतार-चढ़ाव के साथ चलता है और इसीलिए इसे राजनीति की रामा-श्यामा बोला जाता है.

इधर, मुख्यमंत्री भजनलाल मुख्यमंत्री आवास पर दो दिन से पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों से मुलाकात कर बधाई दे रहे रहे हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक दिन पहले जयपुर और आज पाली अपने निवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और दिवाली की शुभकामनाएं दी.

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आवास पर भी बधाइयों का दौर चल रहा है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सासंद सीपी जोशी, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हरियाणा के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, डिप्टी सीएम दीया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा के यहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता पहुंचे हैं और उन्हें दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दे रहे हैं.

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