10वें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आगाज, 25 नवंबर को पीएम मोदी होंगे शामिल, मध्य प्रदेश होगा स्टेट पार्टनर

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आज से 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की शुरुआत होने जा रही है. ये महोत्सव 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलेगा. 21 दिन तक चलने वाले इस गीता महोत्सव में 25 नवंबर को पीएम मोदी शामिल हो सकते हैं. गीता महोत्सव में हरियाणा की संस्कृति, ज्ञान और आध्यात्मिकता का संगम देखने को मिलेगा. महाभारत काल में युद्ध के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. माना जा रहा है कि इसे 5,163 वर्ष पूरे हो रहे हैं. इसी उपलक्ष्य में 15 नवंबर से कुरुक्षेत्र में 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जो 5 दिसंबर तक चलेगा.

पहली बार ये महोत्सव 21 दिन के लिए आयोजित किया जा रहा है. इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पार्टनर स्टेट मध्य प्रदेश होगा. कार्यक्रम की जानकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर में दी. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि “कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिधि में फैला है. इस क्षेत्र में अनेक तीर्थ हैं. कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा 182 तीर्थों की पहचान की जा चुकी है

मुख्यमंत्री ने कहा कि “यहां परम पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज भी विराजमान हैं. स्वामी ज्ञानानंद महाराज प्रेम और सद्भाव की प्रतिमूर्ति हैं तथा अपनी सहज, सरल और मधुर वाणी से देश-विदेश में गीता और श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से मानव को आचार, विचार एवं व्यवहार के बारे में सीख दे रहे हैं. इनकी ही प्रेरणा और प्रयासों से मॉरीशस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान समेत अन्य देशों में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का भव्य आयोजन हो चुका है. इसके साथ ही कुरुक्षेत्र में हर साल आयोजित होने वाले गीता महोत्सव के सफल आयोजन में स्वामी ज्ञानानंद महाराज की सक्रिय भागीदारी और मार्गदर्शन रहता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि “कुरुक्षेत्र की इस पावन भूमि को भारतीय संस्कृति की क्रीड़ा स्थली होने का गौरव प्राप्त है. इसी भूमि में पावन सरस्वती के तटों पर वेदों, उपनिषदों और पुराणों की रचना हुई और इसी भूमि को श्रीमद्भगवद्गीता की जन्मस्थली होने का विशेष सौभाग्य प्राप्त हुआ. कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में मोह ग्रस्त अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत गीता का जो शाश्वत उपदेश दिया गया था, इस वर्ष इस उपदेश को दिए हुए 5,163 वर्ष हो जाएंगे.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान कहा था कि कुरुक्षेत्र को गीता स्थली के रूप में पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. उनसे प्रेरणा प्राप्त कर गीता महोत्सव को कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत वर्ष 2016 में की थी, तब से अब तक पिछले 9 वर्षों से इस महोत्सव को अपार सफलता और लोकप्रियता मिली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव भारत देश की सीमाओं से भी बाहर विदेशों में मनाया जाने लगा है

मुख्यमंत्री ने कहा कि “इस वर्ष भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में 16 देशों के 25 विद्वानों की उपस्थिति रहेगी. विदेश मंत्रालय के माध्यम से 51 देशों में गीता महोत्सव के कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जिनका लाइव प्रसारण रहेगा. विदेश मंत्रालय द्वारा दूसरे देशों में विभिन्न भाषाओं में अनुवाद की गई श्रीमद्भागवत गीता की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी. फिजी और त्रिनिदाद एवं टोबेगो से 20 पंडित 2 दिन के लिए कुरुक्षेत्र आ रहे हैं, जोकि महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे. इसके अलावा 7 देशों के 25 शिल्पकारों द्वारा अपनी शिल्प का प्रदर्शन महोत्सव के दौरान किया जाएगा.

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि “महोत्सव के दौरान सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, हरियाणा द्वारा एक यूट्यूब चैनल चलाया जाएगा. इसमें विभिन्न श्रद्धालु श्रीमद्भगवद गीता में अपने पसंदीदा श्लोक एवं उस श्लोक से उनके जीवन में आए बदलाव पर अपना अनुभव साझा करेंगे. सबसे ज्यादा देखे जाने वाली वीडियो क्लिप को महोत्सव के समापन समारोह में 1 लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि “15 नवम्बर से 5 दिसंबर 2025 तक ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर भव्य गीता महाआरती का आयोजन किया जाएगा. इसी तरह 25 नवम्बर से 1 दिसम्बर तक 48 कोस कुरुक्षेत्र भूमि के तीर्थों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. गीता जयंती के दिन 1 दिसम्बर को ज्योतिसर तीर्थ पर गीता यज्ञ, गीता पाठ एवं भगवत कथा का आयोजन होगा. उसी दिन थीम पार्क, कुरुक्षेत्र में 18 हजार विद्यार्थियों द्वारा गीता का वैश्विक पाठ किया जाएगा. इसमें देश-विदेश से लाखों गीता प्रेमी एवं श्रद्धालु ऑनलाइन भी जुड़ेंगे. इसके साथ ही उसी दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में 48 कोस तीर्थ सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसमें कुरुक्षेत्र भूमि के 182 तीर्थ समितियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे.”

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