उत्तराखंड: भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G अधिनियम) उत्तराखंड राज्य के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. इस योजना को लेकर बात करते हुए खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बात की. सीएम ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आपदा के दृष्टिगत काफी संवेदनशील है. ऐसे में इस योजना से मिलने वाली धनराशि के जरिए आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकेगी. साथ ही त्वरित रूप से लोगों को सहायता पहुंचा सकेंगे.
सीएम धामी ने इस अधिनियम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह नया अधिनियम केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की संरचनात्मक पुनर्रचना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र एवं इकाइयां मजबूत हो सकेंगी. उन्होंने इसे गांव को विकसित बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि यह अधिनियम किसानों को सुरक्षा, श्रमिकों को रोजगार, महिलाओं को सम्मान, गांवों का विकास और विकसित गांव के माध्यम से विकसित भारत के लिए मजबूत नींव बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा.
विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण योजना, विकास आधारित गारंटी प्रदान के साथ अब ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिन के रोजगार का अधिकार प्रदान करेगा, जो पहले से 25 फीसदी अधिक होगा. इसके तहत 15 दिन में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अनिवार्य रूप से दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई है, साथ ही इसके लिए अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की गई है. उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत दिए जाने भुगतान साप्ताहिक होगा और विलंब होने पर मुआवजे का प्रावधान किया गया है.
वीबी-जी राम जी में किसान हितों की स्पष्ट रूप से सुरक्षा सुनिश्चित की गई है. खेती के बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिन तक योजना के काम कानूनी रूप से रोके जा सकेंगे, जिससे किसानों को मजदूरों की कमी नहीं होगी एवं खेती की लागत भी नहीं बढ़ेगी साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था संतुलित रहेगी.
सीएम ने कहा कि वीबी-जी राम जी के तहत ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को असली ताकत प्रदान की गई है. इस योजना में काम थोपे नहीं जाएंगे बल्कि विकास कार्यों का चिन्हीकरण ग्राम सभा द्वारा ही तय किया जाएगा. कम से कम 50 फीसदी काम सीधे ग्राम पंचायतों के स्तर पर कराए जा सकेंगे. इसके तहत जॉब कार्ड, पंजीकरण, योजना निर्माण जैसे कार्य ग्राम सभा के स्थानीय स्तर पर तय होंगे.
वीबी-जी राम जी के तहत काम की गुणवत्ता और उपयोगिता का विशेष प्रावधान रखा गया है. इसके तहत अब जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियां, आपदा प्रबंधन के तहत आने वाले कामों को किया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से तालाब, चेकडैम, स्टॉपडैम, सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, SHG शेड, स्किल सेंटर, हाट, रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज, पिचिंग जैसे कार्य होंगे. इससे सबको काम भी मिलेगा और गांव भी मजबूत होगा.
वीबी-जी राम जी के तहत महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहनों के लिए स्किल सेंटर, शेड निर्माण, ग्रामीण हाट आदि बनाए जाएंगे जिससे महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिलेगा. ग्राम रोजगार सहायक, फील्ड असिस्टेंट, तकनीकी सहायक आदि इस योजना की रीढ़ हैं. इनके प्रशिक्षण, मानदेय और निगरानी के लिए प्रशासनिक खर्च 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी किया गया है, जिसके कारण काम की गुणवत्ता बढ़ेगी, भुगतान समय पर होगा एवं निगरानी मजबूत हो सकेगी.
वीबी-जी राम जी के तहत निष्पक्ष वित्तीय प्रबंधन पर भी ध्यान दिया गया है. इसमें सामान्य राज्यों के लिए 60:40 का अनुपात और हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात किया गया है. इसके तहत अब स्पष्ट वार्षिक बजट का प्रावधान होगा जिसमें पहले अनिश्चितता रहती थी. इस अधिनियम के तहत उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य को केंद्र सरकार की ओर 90 प्रतिशत वित्तीय सहयोग मिलेगा, जिससे राज्य पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और तेज़ी से होगा.
VB-G RAM G उत्तराखंड राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य के रूप में उत्तराखंड में जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण अवसंरचना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. यह अधिनियम उत्तराखंड के गांवों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के साथ ही ग्रामसभाओं के विकास को और मजबूती प्रदान करेगा. SBI की ओर से किए गए विश्लेषण के अनुसार इस अधिनियम से राज्यों को करीब 17,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होगा.
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को हर साल किसी न किसी रूप से आपदाओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें भूस्खलन, जलभराव और बादल फटने की घटनाएं शामिल हैं. ऐसे में आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत यह योजना बहुत महत्वपूर्ण है. लिहाजा इस योजना के तहत जो धनराशि प्राप्त होगी उससे आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकती है. साथ ही ग्राम सभा स्तर पर तत्काल एक्शन लेते हुए त्वरित रूप से लोगों को सहायता पहुंचा सकते हैं.