जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन में पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा

जेएलएफ 2026 के आगाजा का गवाह दीया कुमारी और सचिन पायलट भी बने. इस मौके पर मंच से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान की धरती ‘पधारो म्हारे देश’ का संदेश देती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की यह धरती सदा से ज्ञान, कला और संस्कृति के संवाहक रही है.

उन्होंने कहा कि लिटरेचर फेस्टिवल साहित्य का मेला नहीं, बल्कि विचारों का महासमर है. उन्होंने कहा कि यहां दुनिया भर के विद्वान आते हैं. मुख्यमंत्री भजनलाल ने कहा कि यह फेस्टिवल विचारों का उत्सव, शब्दों का संगम और संस्कृतियों के बीच महासंवाद का सेतु है. उन्होंने कहा कि इस मंच से राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर बल मिलता है.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि साहित्य, संगीत और कला से विहीन मानव पशुओं के समान होता है. ऐसा हमारे पूर्वजों ने कहा है. यही कारण है कि हमारे पूर्व जन्म में ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और जन कल्याण के ग्रंथ और श्लोक लिखे हैं. उन्होंने ज्ञान को साहित्य के जरिए लोगों तक पहुंचा कर लोकप्रिय बनाया है. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के कथन को याद दिलाते हुए कहा कि किसी भी उत्सव पर गुलदस्ते नहीं, पुस्तक बांटना बेहतर है.

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के शुभारंभ को लेकर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि यह फेस्टिवल आज एक ब्रांड बन चुका है, जो जयपुर के लिए गर्व और खुशी का विषय है. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह फेस्टिवल पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेने आते हैं. यहां केवल पुस्तकों पर चर्चा ही नहीं होती, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों का आदान-प्रदान भी देखने को मिलता है. फेस्टिवल के दौरान शाम के समय शहर के अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है.

लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि सहमति और असहमति के साथ सभी बातों को सोचने और समझने का मौका यहां पर मिलता है. उन्होंने कहा कि यह एक ग्लोबल ब्रांड बन गया है, जिसका हम सभी को फक्र करना चाहिए. इस दौरान एक सवाल पर उन्होंने SIR को लेकर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अंतिम प्रक्रिया को लेकर संदेश व्यक्त किया.

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