राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से शुक्रवार को जयपुर में तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा (संरक्षण, जागरूकता और न्याय तक पहुंच) विषय पर सेमिनार का आगाज हुआ. सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस सेमिनार का आगाज किया. इस मौके पर राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देशन में रालसा की कई नई पहल का भी आगाज हुआ. ई समाधान-डिजिटल मीडिएशन प्लेटफॉर्म, बुक एवं हैंडबुक्स की भी लॉन्चिंग की गई. उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ साइबर सुरक्षा पर मंथन करेंगे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि साइबर अपराध की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है. यह आज वैश्विक समस्या बन गया है. जिसका समाधान हम सबको मिलकर निकालना होगा.
उन्होंने कहा कि उनके नाम से आए दिन नई साइट बन जाती हैं और उसमें उनके फोटो अपलोड हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि इसी तरह की साइट से मेरी बेटी और बहन को मैसेज भेजे गए, लेकिन वो उनकी भाषा समझ गई. जब मैंने इसकी शिकायत साइबर पुलिस में की तो पता चला कि ये सभी साइट्स नाइजीरिया में बन रही हैं. उन्होंने कहा कि साइबर अपराध इस चिंताजनक हालत में बढ़ गया है कि साइबर फ्राड से पचास हजार करोड रुपए ठगे गए हैं और करीब 66 लाख शिकायतें लंबित चल रही हैं.
उन्होंने कहा, साइबर सुरक्षा आज बहुत अहम विषय है. हमें बचपन से बताया गया कि पहले सोचो और फिर करो. इसी अनुशासन के दम पर साइबर खतरों से बचा जा सकता है. साइबर फ्रॉड के कई प्रकार हैं. डिजिटल अरेस्ट के शिकार बुजुर्ग के मामले में उन्होंने खुद संज्ञान लिया है. आज भी वे इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. बड़ी संख्या में साइबर फ्रॉड की शिकायतें आज भी पेंडिंग है. यह एक वैश्विक चुनौती बनती जा रही है. इसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं है. उनके खुद के नाम से हर दिन कोई नई वेबसाइट बनाई जा रही है. जिसकी जानकारी उन्हें परिचितों से मिलती है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, आज तकनीक दुधारी तलवार है. जिसके फायदे और नुकसान दोनों हैं. साइबर सुरक्षा पर यह पहल प्रशंसनीय है. जिनके इरादे गलत हों, उन्हें मौका नहीं मिले. इसलिए जागरूकता सबसे जरूरी और प्रासंगिक है. डिजिटल दुनिया के नए खतरे भी सामने आए हैं. साइबर अपराध के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं. लालच और अज्ञानता से लोग फंस रहे हैं. ऑनलाइन ठगी और डिजिटल फ्रॉड आज सबसे बड़ी चुनौती है. सबसे पहली जरूरत जागरूकता की है. जागरूक नागरिक ही सुरक्षित नागरिक है. सरकार ने साइबर क्राइम से निपटने के लिए I4C की जाएगी. साइबर अपराधियों पर कठोर कार्रवाई हो रही है. साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष साइबर कोर्ट की स्थापना की जाएगी.
न्यायाधीश डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा, तीन दिन की कॉन्फ्रेंस को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश के कोने-कोने से जज आए हैं. साइबर सुरक्षा आम आदमी से जुड़ा अहम विषय है. डाटा की कोई बाउंड्री नहीं है. आमजन को जागरूक करना बहुत जरूरी है. तकनीक जल्दी बदल रही है कि इसके खतरों और भय को रोकना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है. उच्च शिक्षित लोग भी डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर क्राइम का शिकार हो रहे हैं. उन्होंने कहा, दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था साइबर लूट की है. साइबर अपराध बिना दिशा के आगे बढ़ रहा है. हाईकोर्ट में लगातार बम की धमकियां मिल रही हैं. इससे सभी परेशान हैं. प्रॉक्सी सर्वर से धमकीभरे ईमेल आ रहे हैं. जांच एजेंसियां भी इसका तोड़ नहीं निकाल पा रही हैं.