नोएडा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट परिसर का निरीक्षण किया. उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू भी मौजूद हैं. उद्घाटन से पहले सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मोदी को भगवान बुद्ध का एक पवित्र अवशेष भेंट किया गया.
एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन के मौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘ ये नौजवानों के भविष्य को उड़ान देगा. नोएडा में यह हवाई अड्डा आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर और फरीदाबाद जैसे क्षेत्रों को बहुत लाभ पहुंचाएगा. यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे उद्योगों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगा.
उड़ानें इस क्षेत्र को दुनिया से जोड़ेंगी, और यह एक विकसित उत्तर प्रदेश के उदय का प्रतीक भी होगा. मैं इस भव्य हवाई अड्डे के लिए उत्तर प्रदेश के लोगों, विशेष रूप से पश्चिमी यूपी के लोगों को बधाई देता हूं.’
उन्होंने आगे कहा,’आज का कार्यक्रम भारत की नई भावना को दर्शाता है. ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भोजन, ईंधन तथा उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की कमी के कारण दुनिया चिंतित है, भारत पूरी ताकत के साथ इस संकट का सामना कर रहा है. सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इसका बोझ आम परिवारों और किसानों पर न पड़े.’
उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों की ओर से मैं इस भव्य और जोशीले समारोह में प्रधानमंत्री जी का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करता हूँ, जिन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है. कल, रामनवमी के शुभ अवसर पर, पूरे देश में उत्सव और उल्लास का माहौल था. वर्तमान में, पूरी दुनिया उथल-पुथल, अराजकता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें आसमान छू रही हैं.
यहाँ तक कि अमेरिका जैसे विकसित देशों और भारत के सभी पड़ोसी देशों में भी न केवल पेट्रोलियम की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, बल्कि इनकी भारी किल्लत भी है. हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है लेकिन भारत के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने, कीमतों को नियंत्रित करने और कल पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को एक बार फिर कम करने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए, मैं उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों की ओर से आपके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ.’
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, ‘दूरदर्शी सोच और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ, पिछले 11-12 वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में एक ‘नए भारत’ की रूपरेखा तैयार की गई है. आज हम उसके परिणाम देख रहे हैं. भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें नियंत्रण में हैं, और उनकी आपूर्ति भी सुचारू रूप से जारी है. इसके विपरीत, अमेरिका जैसे विकसित देशों और भारत के पड़ोसी देशों में भी पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, और वहां इनकी भारी किल्लत बनी हुई है.
एयरपोर्ट के पहले चरण को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत लगभग 11200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भारत के एक ग्लोबल एविएशन हब बनने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है. यह एयरपोर्ट जिसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए एक बड़े इंटरनेशनल गेटवे के तौर पर देखा जा रहा है. देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और क्षेत्रीय व इंटरनेशनल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तौर पर विकसित किया गया है, जो इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पूरक होगा. ये दोनों एयरपोर्ट मिलकर एक इंटीग्रेटेड एविएशन सिस्टम के तौर पर काम करेंगे, जिससे भीड़ कम होगी. साथ ही यात्रियों को संभालने की क्षमता बढ़ेगी और दिल्ली एनसीआर दुनिया के अग्रणी एविएशन हब में अपनी जगह बना पाएगा.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में से एक है. शुरुआत में इस एयरपोर्ट की यात्री संभालने की क्षमता सालाना 12 मिलियन यात्री (MPPA) होगी जो पूरी तरह से विकसित होने पर बढ़कर 70 एमपीपीए तक पहुंच जाएगी.
इसमें 3900 मीटर लंबा रनवे है जो बड़े आकार के विमानों को संभालने में सक्षम है. इसके साथ ही इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम भी हैं जिनमें इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग शामिल हैं जो कुशल, हर मौसम में और चौबीसों घंटे चलने वाले ऑपरेशंस में मदद करते हैं.
इस एयरपोर्ट में एक मजबूत कार्गो इकोसिस्टम भी शामिल है. इसमें एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब है, जिसमें एक इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स जोन शामिल हैं. पीएमओ की प्रेस रिलीज के अनुसार यह कार्गो सुविधा सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कार्गो संभालने के लिए डिजाइन की गई है. इसे बढ़ाकर लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक किया जा सकता है. इसमें 40 एकड़ में फैली एक खास मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा भी शामिल है.
एक टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तौर पर डिजाइन किया गया, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का लक्ष्य एक ‘नेट-जीरो एमिशन’ सुविधा के तौर पर काम करना है. इसके लिए इसमें ऊर्जा-कुशल सिस्टम और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीकों को शामिल किया गया है.
इसका आर्किटेक्चरल डिजाइन भारतीय विरासत से प्रेरणा लेता है, जिसमें पारंपरिक घाटों और हवेलियों की याद दिलाने वाले तत्वों को शामिल किया गया है. इस तरह यह सांस्कृतिक सौंदर्य को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ता है.