प्रदेश की भजनलाल सरकार में एक बार फिर राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इसके साथ पूर्व आईएएस नरेश कुमार ठकराल को सदस्य सचिव बनाया गया है. शनिवार को राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के निर्देश पर वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया ने इसके आदेश जारी किए. दोनों की नियुक्ति डेढ़ साल की होगी.
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के निर्देश पर वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-आई और 243-वाई तथा राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के उपबन्धों के अनुसरण में राज्यपाल राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं, जो अरूण चतुर्वेदी, अध्यक्ष और नरेश कुमार ठकराल, से.नि. आईएएस सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है.
आयोग के अध्यक्ष और सदस्य सचिव इस अधिसूचना की तारीख से डेढ़ वर्ष की कालावधि के लिए पद धारण करेंगे. बता दें कि अरुण चतुर्वेदी बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के समय कैबिनेट मंत्री रहे हैं. इस विधानसभा चुनाव में अरुण चतुर्वेदी को पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन अब उनके वरिष्ठ और कार्य शैली को देखते हुए उन्हें वित्त आयोग के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी है.
राजस्थान वित्त आयोग के नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए अरुण चतुर्वेदी ने कहा है कि आयोग अपनी सीमाओं में रहकर पंचायतों और नगर निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने को लेकर सुझाव देगा. उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र की भाजपा नेतृत्व का आभार है कि एक साधारण कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई. चतुर्वेदी ने कहा, “मैं अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाऊंगा. आयोग का मुख्य कार्य पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों की टैक्स व्यवस्था, संसाधनों और विकास कार्यों की समीक्षा करना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जा सके.” उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने और पंचायत व नगर निकायों में जन सेवा के कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक सुधारों पर काम होगा. चतुर्वेदी ने ज़ोर देकर कहा कि टैक्स कलेक्शन की व्यवस्था और केंद्र व राज्य सरकार से मिलने वाली धनराशि का सही ढंग से पुनर्वितरण (रिलोकेशन) सुनिश्चित करना भी आयोग की प्राथमिकता होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग संवैधानिक सीमाओं में रहकर ही सुझाव देगा, ताकि स्थानीय निकायों का विकास और सेवा कार्यों की गुणवत्ता बेहतर हो सके.
ये रहेगा काम :
- आयोग सभी स्तरों पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति का पुनर्विलोकन करेगा कई विषयों के संबंध में सिफारिश करेगा.
- आयोग सभी स्तरों पर नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का पुनर्विलोकन भी करेगा और कई विषयों के संबंध में सिफारिश करेगा.
- आयोग ऐसे समस्त मामलों में, जहां जनसंख्या करों और शुल्कों और सहायता अनुदानों के न्यागमन के निर्धारण के लिए एक कारक के रूप में है, वहां 2011 जनगणना की जनसंख्या को अंगीकृत करेगा.
- आयोग उन आधारों को उपदर्शित और उपलब्ध करवायेगा जिन पर उसके निष्कर्ष आधारित है साथ ही स्थानीय सरकारों के प्राप्तियों और व्यय के प्राक्कलन किया गया है.
- आयोग, ऐसे उपान्तरणों के साथ जो आवश्यक हो, भारत सरकार के 13वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए आदर्शों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा.
- आयोग अपने कार्यकाल की समाप्ति अथवा समाप्ति के पूर्व, 1 अप्रैल, 2025 से प्रारंभ होने वाले पांच वर्षों की अवधी के लिए, उपर्युक्त प्रत्येक मामले पर, अपनी रिपोर्ट (अंग्रेजी और हिन्दी में) उपलब्ध करवायेगा.