राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षा और भारतीयों में धांधली और गड़बड़ी के एक के बाद एक अलग-अलग तरह के मामले उजागर हो रहे हैं. पेपर लीक और डमी कैंडिडेट के जरिए नौकरी पाने के मामले कि अभी जांच चल ही रही है कि दिव्यांग कोटे में लगने वाले अभ्यर्थियों के मामले में और ज्यादा चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, अन्य भर्तियों की तरह फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले कार्मिकों को लेकर गुरुवार को भजनलाल सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है.
सरकार अब उन सभी कार्मिकों की जांच करेगी जो दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए सरकारी नौकरी लगे हैं. इन सभी कार्मिकों का फिर से मेडिकल चेपक होगा और दिव्यांगता के मापदंड देखे जाएंगे. खास बात है कि फर्जी प्रमाण पत्र से नोकरी लगने कार्मिकों पर कानूनी कार्रवाई भी होगी साथ ही नौकरी से भी बर्खास्त किया जाएगा.
कार्मिक विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुमार पाठक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी विभागों में लगे दिव्यांग कोटे के कर्मचारियों की फिर से जांच करने का फैसला किया है. इसके लिए सरकारी हॉस्पिटल में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की निगरानी में दिव्यांग कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा. ऐसे में अगर कोई भी कर्मचारी फर्जी ढंग से नौकरी करता पाया गया, उसके खिलाफ सरकार सख्त एक्शन लेगी.
सरकार द्वारा अधिकृत मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सरकार द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की निगरानी में उनका नियम अनुसार परीक्षण किया जाएगा. इसके साथ ही उनके डॉक्युमेंट की भी फिर से जांच की जाएगी. अगर किसी भी कर्मचारी में दिव्यांगता या फिर डॉक्युमेंट में कमी पाई जाती है. उसके खिलाफ कार्मिक विभाग द्वारा सख्त एक्शन लिया जाएगा. इसके साथ ही कार्मिक विभाग संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को भी शिकायत देगा.