राजस्थान में भजनलाल सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर सियासी चर्चाओं को बल मिला है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरे के बाद अब नवरात्रि में मंत्रिमंडल फेरबदल संभावना बन रही है. राजनीति के पंडित कह रहे हैं कि सीएम को केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिल चुकी है. ऐसे में इसी महीने में फेरबदल देखने को मिल सकता है.
मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा के बाद प्रदेश के मंत्रियों के दिल्ली दौरे शुरू हो गए हैं. राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि भजनलाल मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिल चुकी है. दिवाली से पहले फेरबदल देखने को मिल सकता है, जिसमें कई चेहरे को मौका मिलेगा तो वहीं, आधा दर्जन के करीब मंत्री जिनकी परफॉर्मेंस से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है. उन्हें बाहर किया जा सकता है.
राजनीतिक विश्लेषक विवेकानंद शर्मा बताते हैं कि जिस तरह के दिल्ली से संकेत दिख रहे हैं, उससे ये साफ है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर शीर्ष नेतृत्व की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को फ्री हैंड दे दिया गया है. ऐसे में सीएम परफॉर्मेंस के अनुसार मंत्रियों को प्रमोट कर सकते हैं. कुछ को बाहर का रास्ता भी दिखा सकते हैं. सियासी हलकों में चर्चा है कि मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा इसी हफ्ते एक बार फिर दिल्ली जा सकते हैं. दिल्ली से ही नामों पर मुहर लगेगी.
मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद फेरबदल की घोषणा होना तय है. विवेकानंद बताते हैं कि भाजपा चौघड़िया और शुभ मुहूर्त देखकर काम करती है. श्राद पक्ष खत्म होने के साथ नवरात्रि शुरू होंगे. ऐसे में इस बात के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं कि नवरात्रि या दिवाली से पहले मंत्रिमंडल फेरबदल देखने को मिल सकता है, जिसमें कई चेहरे को मौका मिलेगा तो वहीं, आधा दर्जन के करीब मंत्री जिनकी परफॉर्मेंस से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है, उन्हें बाहर किया जा सकता है.
विवेकानंद शर्मा बताते हैं कि भजनलाल सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत जनवरी 2026 में पंचायत और निकाय चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर चुकी है. पंचायत-निकायों का पुनर्गठन और सीमांकन का काम भी लगभग पूरा हो चुका है. सरकार अब जल्द ही चुनाव के लिए मैदान में उतरने वाली है. सरकार के 2 साल बाद होने वाले के चुनाव पार्टी के लिए खास समय महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि निकाय चुनाव के सियासी समीकरण को साधने के लिए भी मंत्रिमंडल फेरबदल होना जरूरी है.
इस मंत्रिमंडल बादल में पंचायत और निकाय चुनाव को देखते हुए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधा जाएगा. वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 24 कैबिनेट और राज्य मंत्री हैं. संवैधानिक नियम के हिसाब से सरकार 15% तक मंत्री बना सकती है. इस लिहाज से राजस्थान में 200 विधानसभा सीट हैं और सरकार 30 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है. 6 विधायकों को मंत्री के रूप में नियमानुसार शामिल किया जा सकता है. इसके साथ जो मौजूदा मंत्री हैं उनमें से कुछ मंत्रियों की परफॉर्मेंस देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करके अन्य विधायकों को इसमें शामिल किया जा सकता है.
हालांकि, निकाय और पंचायत चुनाव से पहले किसी भी मंत्री को हटाना सरकार के लिए राजनीतिक लिहाज से थोड़ा मुश्किल निर्णय होगा, लेकिन जाति और क्षेत्रीय संतुलन को बनाते हुए मुख्यमंत्री यह बड़ा फैसला ले सकते हैं. विवेकानंद कहते हैं कि सरकार के अब 2 साल पूरे हो चुके हैं. ऐसे में सरकार को अब अपनी परफॉर्मेंस दिखानी होगी, क्योंकि पूर्ववर्ती सरकार की कमियों को गिनाने का समय खत्म हो गया है. अब सरकार अपने कामकाज को धरातल पर उतारकर, आम जनता को एक संदेश देगी.