आज से सूरजकुंड मेले का आगाज हो गया है. उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने मेला साथी मोबाइल ऐप को लॉन्च किया. इस ऐप के जरिए मेले की सारी जानकारी मिल सकेगी. जैसे कि कहां किस चीज का स्टॉल लगा है. कहां पार्किंग है. कहां खाने के स्टॉल है. इस तरह की सारी जानकारी मोबाइल ऐप से मिल सकेगी.
अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि “कारीगर भारत की सभ्यतागत विरासत के संरक्षक हैं और सूरजकुंड मेला राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा और आत्मनिर्भर भावना को दर्शाता है, जो वसुधैव कुटुंबकम की भावना का प्रतीक है.” इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी मौजूद रहे. 15 फरवरी को मेले का समापन होगा. इसका नाम अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव रखा गया है.
पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने बताया कि “पार्टनर नेशन के तौर पर इजिप्ट चौथी बार शिल्प महोत्सव में अपनी प्राचीन कला एवं संस्कृति के साथ पर्यटकों को आकर्षित करेगा, जबकि थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक एवं लोक कलाओं का प्रदर्शन मेला परिसर में किया जाएगा. गत वर्ष 44 देशों के 635 प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था, इस वर्ष 50 से अधिक देशों के लगभग 800 प्रतिभागी शामिल होंगे.”
हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि “39 वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव दुनिया के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मानचित्र पर मजबूत दस्तक देगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत संकल्प से सिद्धि तक ले जाने के उद्देश्य के साथ यह शिल्प महोत्सव राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, हस्तशिल्पियों और बुनकरों की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करेगा और वैचारिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को नई गति देगा. इसके लिए मूल मंत्र लोकल से ग्लोबल–आत्मनिर्भर भारत की पहचान होगा.”
पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बताया कि “1977 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेले की शुरुआत हुई. पर्यटन सहित सभी विभाग इस कार्य में जुटा हुआ है. इस बार 40 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में मेले का आयोजन किया जा रहा है. मेले को लेकर हर साल लोगों में उत्साह बढ़ता जा रहा है. 39 वें सूरजकुंड मेले में इस बार 50 से ज्यादा देश शामिल होंगे. इससे स्टॉल लगाने वालों को फाइनेंशियल फायदा होगा और ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल ऑर्डर भी मिलेंगे. मेला हमारे आर्टिस्ट को आगे बढ़ाने का अच्छा प्लेटफॉर्म है. विकसित भारत के लिए ये अच्छा कदम साबित होगा. पिछले साल 1 करोड़ 80 लाख रुपये की सेल सिर्फ जेल विभाग की हुई थी.