अंता विधानसभा उपचुनाव: भाजपा ने मोरपाल सुमन को उम्मीदवार बनाया, प्रमौद जैन भाया से होगी टक्कर

लंबे मंथन के बाद भाजपा ने आखिरकार अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है. बीजेपी ने बारां पंचायत समिति के मौजूदा प्रधान मोरपाल सुमन को प्रत्याशी बनाया है. मोरपाल स्थानीय नेता हैं, पार्टी ने स्थानीय पर ही इस बार दांव खेला है. शुक्रवार को राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने मोरपाल सुमन के नाम की घोषणा की.

मोरपाल सुमन स्थानीय नेता हैं और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय भी हैं. इसलिए पार्टी ने मोरपाल पर दांव खेला है. साथ ही लो प्रोफाइल नेता की छवि है. माली समाज से आने वाले सुमन क्षेत्र के जातिगत समीकरण में भी साधने में कामयाब होंगे. बता दें कि लंबे मंथन के बाद मोरपाल के नाम पर पार्टी के सभी नेता एकजुट हुए, जिसके बाद उन्हें टिकट मिला है. कांग्रेस ने यहां से पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को प्रत्याशी बनाया है. वहीं नरेश मीणा निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है.

अंता से भाजपा ने मोरपाल सुमन को उम्मीदवार बनाया

अंता विधानसभा क्षेत्र एक नजर में

  • 2,26,227 कुल मतदाता
  • 1,15,982 पुरुष, 1,10,241 महिलाएं और 4 अन्य
  • 20.5% एससी
  • 16.75% एसटी
  • 13.25% मुस्लिम
  • 16.5% माली
  • 9% धाकड़
  • 4% गुर्जर
  • 11% सामान्य वर्ग
  • 8% ओबीसी
  • 1% ईसाई व अन्य

प्रदेश में भजन लाल सरकार बनने के बाद ये आठवां उपचुनाव होने जा रहा है. इससे पहले 7 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं. इनमें बीजेपी ने 7 में से 5 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस ने केवल एक सीट जीती. वहीं एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई. जिन 7 सीटों पर उपचुनाव हुए उनमें से 4 सीट कांग्रेस के पास थीं, उसके पास केवल एक सीट रह गई थी. पिछले साल खींवसर, देवली-उनियारा, झुंझुनूं, दौसा, चौरासी, रामगढ़ और सलूंबर सीटों पर उपचुनाव हुए थे. इनमें खींवसर, देवली-उनियारा, झुंझुनूं, रामगढ़ और सलूंबर सीटों पर बीजेपी जीती, जबकि दौसा में कांग्रेस और चौरासी में भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की.

हालांकि अंता उपचुनाव के नतीजों से सरकार की संख्या पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक पर्सेप्शन पर इसका बड़ा असर होगा. यदि बीजेपी यह सीट जीतती है तो इसे सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के रूप में देखा जाएगा, वहीं, अगर हार होती है तो विपक्ष इसे जनता की नाराजगी का संकेत बताकर हमलावर रुख अपना सकता है.

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