उत्तराखंड की 6,940 करोड़ की 12 परियोजनाओं की सीएम ने की समीक्षा, 15 अक्टूबर तक पूरा करने के निर्देश

उत्तराखंड: देश को साल 2047 तक विकसित भारत बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इस दिशा में उत्तराखंड भी काम कर रहा है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित बैठक में प्रगति पोर्टल के जरिए राज्य की तमाम महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की. बैठक के दौरान परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन और अन्य विभागों की 6,940 करोड़ की कुल 12 प्रमुख परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी ली गई.

सीएम पुष्कर धामी ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं के कामों में और तेजी लाने के लिए सीएम स्तर पर हर महीने, मुख्य सचिव स्तर पर 10 दिनों में इसकी समीक्षा की जाए. परियोजनाओं में देरी पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार सख्त कार्रवाई भी की जाएगी.

सीएम धामी ने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, क्षतिपूर्ति भुगतान या अन्य प्रशासनिक कारणों से विलंब हो रहा है, उनके समाधान के लिए संबंधित विभाग समन्वित रूप से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें. सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रगति पोर्टल को प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग करते हुए हर परियोजना की लगातार समीक्षा की जाए. इसके साथ ही लंबित प्रकरणों का समय पर निस्तारण किया जाए.

बैठक में रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला, बनबसा एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र परियोजनाओं, चारधाम सड़क परियोजनाओं, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना, हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई.

सीएम धामी ने वन भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों, भूमि अधिग्रहण तथा क्षतिपूर्ति वितरण से संबंधित लंबित मामलों के जल्द समाधान के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समय सीमा निर्धारित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. उन्होंने जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए कि जिला स्तर पर लंबित मामलों की व्यक्तिगत निगरानी कर उनका तत्काल निस्तारण करें.

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर परियोजना के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर से कम है, उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर जल्द परिणाम सुनिश्चित किए जाएं. ताकि, साल 2047 तक विकसित भारत बनाने को बल मिल सके.

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