पंजाब में बाढ़ संकट के बीच पंजाब कैबिनेट की एक अहम बैठक हुई. बैठक में बाढ़ प्रभावितों के लिए बड़े फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अस्पताल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैबिनेट की बैठक में हिस्सा लिया. बैठक के बाद, मुख्यमंत्री मान ने वीडियो संदेश के जरिये कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी.
बाढ़ ने नदियों को मिट्टी और रेत से भर दिया है, जिससे कई नदियों की चौड़ाई कम हो गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यास नदी पहले बहुत चौड़ी थी, लेकिन अब इसकी चौड़ाई काफी कम हो गई है. इसीलिए इस नदी ने आसपास के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. सरकार ने “जिसका खेत, उसकी रेत” नामक नीति बनाई है. किसान अपनी जमीन से रेत निकाल सकेंगे और चाहें तो उसे बेच भी सकेंगे.
फसल के नुकसान के लिए 20 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा दिया जाएगा. यह अब तक किसी भी राज्य सरकार द्वारा दिया गया सबसे बड़ा मुआवज़ा है. मुआवजे की राशि के चेक सीधे किसानों को दिए जाएंगे. पानी कम होने पर चेक सत्यापन करके किसानों को दिए जाएंगे.
बाढ़ के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. जिन लोगों के घर बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें आर्थिक सहायता मिलेगी. यह धनराशि भी सत्यापन के बाद ही दी जाएगी. जिन लोगों के पशुओं की मृत्यु हुई है, उन्हें भी सरकार मुआवज़ा देगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों ने पंजाब सहकारी बैंकों से ऋण लिया है, उन्हें छह महीने तक कोई किश्त नहीं देनी होगी. इस दौरान कोई ब्याज भी नहीं लगेगा.
बाढ़ का पानी उतरने के बाद टीकाकरण अभियान शुरू होगा. लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे. पानी उतरने के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाया जाएगा. फॉगिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी. हर गांव में कैंप लगाए जाएंगे ताकि लोगों की जांच की जा सके. शहरों और गांवों में सफ़ाई की जाएगी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 23 बाढ़ प्रभावित ज़िलों के 2050 गांवों में 3,87,898 लोग बेघर हो गए हैं. 20 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. पंजाब सरकार ने अब तक राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों से 22,938 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. इसके अलावा, राज्य सरकार ने 219 राहत शिविर खोले हैं.
इन शिविरों में 5404 लोगों को ठहराया गया है. राज्य के कई जिलों में अब तक कुल 176980.05 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है. उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण अब तक 48 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पठानकोट जिले के 3 लोग लापता हैं.